५. विसमवुत्तिनिद्देस-पञ्चमपरिच्छेद
११८.न’ट्ठक्खरेसु पादेसु, स्ना’दिम्हा यो’ण्णवा वत्तं।
११९.समेसु सिन्धुतो जेन, पथ्यावत्तं पकित्तितं।
१२०.ओजेसु जेन सिन्धुतो, त’मेव वीपरीता’दि।
१२१.न,कारो चे जलधितो, चपलावत्त’मिच्चे’तं।
१२२.समे लो सत्तमो यस्सा, विपुला पिङ्गलस्स सा।
१२३.सेतवस्सा’खिलेसुपि।
१२४.भेन’ण्णवा भ’ब्बिपुला।
१२५.एव’मञ्ञा रो चतुत्था।
१२६.नो’ण्णवा चे नविपुला।
१२७.तो’ण्णवा तथा’ञ्ञा सिया।
वत्त’प्पभेदो।
नदिस्सते’त्थ यं छन्दं, पयोगे दिस्सते यदि।
विसम’क्खरपादं तं, गाथा सामञ्ञनामतो॥
इति वुत्तोदये छन्दसि विसमवुत्ति निद्देसो नाम
पञ्चमो परिच्छेदो।